۲۹ اردیبهشت ۱۴۰۱ |۱۷ شوال ۱۴۴۳ | May 19, 2022
हुसैनी क़ुम्मी

हौज़ा / हज़रत फातिमा ज़हरा (स.अ.) के रौज़े के खतीब ने कहा: पवित्र कुरान में 100 बार से अधिक धैर्य शब्द का उल्लेख किया गया है और पवित्र कुरान ने 20 बार धैर्य का आदेश दिया है। हमारे समाज को आज हज़रत ज़ैनब (स.अ.) के धैर्य और धीरज से सीखने की आवश्यकता है क्योंकि इस महान महिला के जीवन के विभिन्न पहलू हमारे लिए शिक्षाप्रद हैं। 

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैय्यद हुसैन हुसैनी कुम्मी ने हज़रत फातिमा मासूमा के हरम में संबोधित करते हुए कहा: अल्लामा मामाक़ानी ने इल्मे रिजाल की एक पुस्तक मे हज़रत ज़ैनब (स.अ.) का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर मैं यह कहूं कि यह बा अज़मत खातून मकामे अज़मत पर क़ायम थी इस बात का कोई इनकार नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा: आज हमारे समाज को इस महान महिला को अपना आदर्श बनाने की आवश्यकता है क्योंकि उनके जीवन के विभिन्न पहलू हमारे लिए शिक्षाप्रद हैं।

हुज्जतुल इस्लाम सैय्यद हुसैनी कुम्मी ने कहाः इस महान महिला के धैर्य का कोई उदाहरण नही मिलता। इन्होने कठिन समय में भी अपना धैर्य नहीं खोया। और सब्र का दामन हाथ से नहीं छूटा।

उन्होंने आगे कहा:पवित्र कुरान में 100 बार से अधिक सब्र(धैर्य )शब्द का उल्लेख किया गया है और पवित्र कुरान ने 20 बार सब्र(धैर्य) का आदेश दिया गया है।

हज़रत फ़ातिमा मासूमा के दरगाह के वक्ता ने कहा: हज़रत ज़ैनब (अ.स.) ने रोज़े आशूरा(10 मोहर्रम) को 18 जवानों की कुर्बानी अल्लाह की राह में पेश करने के बाद कठिन मुसीबतों का सामना किया फिर भी सब्र का दामन हाथ से नहीं छूटा।

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