۶ تیر ۱۴۰۱ |۲۷ ذیقعدهٔ ۱۴۴۳ | Jun 27, 2022
مولانا سید علی مہدی رضوی قم المقدسہ

हौज़ा / वसीम रूशदी पलीद व खबीसुन्नफ्स इन्सान ने अपनी तमाम खुराफात से साबित तो कर ही दिया है कि वो अहले बैत अस० का खुला हुआ दुश्मन है।आतीत से लेकर वर्तमान तक हर दिन इसकी शैतनत में इज़ाफ़ा ही हुआ है ।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,वसीम रूशदी पलीद व खबीसुन्नफ्स इन्सान ने अपनी तमाम खुराफात से साबित तो कर ही दिया है कि वो अहले बैत अस० का खुला हुआ दुश्मन है।आतीत से लेकर वर्तमान तक हर दिन इसकी शैतनत में इज़ाफ़ा ही हुआ है ।
हर बार इस नामुराद ने कभी उलमा-ए-हक़ तो कभी दीनी मदारिस के खिलाफ ज़हर उगला है , कभी दीन के बुनियादी एहकामात को पामाल किया है
शिया सुन्नी इत्तेहाद के खिलाफ बारहा इस फितनागर ने अपनी ग़लीज़ ज़बान का इस्तेमाल किया है और आज इन्तेहा ये है कि क़ुरआन करीम की तौहीन में भी इस शख्स ने ज़र्रा बराबर भी गुरेज़ से काम नहीं लिया.....!!
यक़ीनन इस खबीस इन्सान की इस गुस्ताखी पर इसकी क़ौम से ला-तअल्लुक़ी और इजहारे बराअत लाज़िम व ज़रुरी है लेकिन क़ाबिल-ए-ग़ौर बात ये है कि इसकी हरकतों से कौन वाक़िफ नहीं है इन तमाम बातों के बावजूद भी नाजाने कितने ऐसे बेगै़रत मौजूद हैं जो इसकी तमाम ख़बासतों के बावजूद भी इसके हामी व तरफदार हैं।
जब ज़रूरत थी कि क़ौम के बुज़ुर्गान व साहेबाने इक़्तेदार इसका सोशल बाईकाट कर के इसके हौसलों को पस्त करते बिलअक्स महफ़िलों , शादीयों और मजलिसों में इसकी शिरकत को मदऊ करने वालों और इस्तेक़बाल करने वालों ने अपने लिए बाएसे में इज़्ज़ो शरफ समझा ।।
शायद इस शैतान के इस अमल से कुछ बेगै़रतों की ग़ैरत जागी हो जो इस पलीद के इस्तेक़बाल को फख्ऱ समझते हैं।

ये वो हामी हैं जो अपनी बज़्म में बुलाना तो पसंद करते हैं लेकिन इनकी ग़ैरत दीनी इतनी मर चुकी है कि इस ख़बीस की ख़बासत पर एक जुमला इसकी मज़म्मत में अदा करना तो दूर की बात है इस तरह ख़ामोश हो गए हैं जैसे सांप सूंघ गया है या सफहे हस्ती से नाबूद हो गए हैं।
हामियों को हरगिज़ हरगिज़ ये नहीं भूलना चाहिए कि जितना बड़ा लानती वसीम है उतने ही लानत के हक़दार वो भी हैं क्योंकि ज़ालिम का साथ देने वाला या अपनी ख़ामोशी से उसके ज़ुल्म की ताईद करने वाला भी ज़ालिम है और वो सब उसके अमल में बराबर के शरीक हैं ज़ाहिर सी बात है जब ज़ुल्म में शरीक हैं तो लानत के भी मुकम्मल हक़दार हैं ।
हामियाने वसीम को अब होश के नाख़ून लेना चाहिए इस से इज़हार-ए-बराअत के साथ साथ अल्लाह की बारगाह में तौबा व इस्तेग़फा़र करना चाहिए ताकि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त रोज़-ए-महशर उन्हें वसीम के साथ महशूर ना करे....!!
सुरह बक़रा/257
ٱللَّهُ وَلِىُّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يُخْرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَوْلِيَآؤُهُمُ ٱلطَّٰغُوتُ يُخْرِجُونَهُم مِّنَ ٱلنُّورِ إِلَى ٱلظُّلُمَٰتِ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلنَّارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ.
अल्लाह साहेबाने ईमान का वली है वो उन्हें तारीकियों से निकाल कर रौशनी में ले आता है
और कुफ्फार के वली ताग़ूत हैं जो उन्हें रौशनी से निकाल कर अंधेरो में ले जाते हैं यही लोग जहन्नुमी हैं और वहां हमेंशा रहने वाले हैं।
दुआ है....!!
ख़ुदाया...! ज़ालेमीन को उनके अंजाम तक पहुंचा दे
और हम सबको सीरत-ए-मोहम्मद व आले मोहम्मद अस० पर चलने की तौफीक़ अता फरमा
आमीन या रब्बल आलमीन

सै० अली मेहदी रिज़वी
क़ुम, ईरान

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