۲۸ مرداد ۱۴۰۱ |۲۱ محرم ۱۴۴۴ | Aug 19, 2022
मौलाना तकी अब्बास

हौजा / अभि मलऊन वसीम जैसे शापित व्यक्ति द्वारा घमासान शांत नही हुआ कि उदास मानसिकता के मालिक नरसिंहनंद सरस्वती ने अपने भ्रम में इस्लाम के एक और स्तंभ को ध्वस्त करने की कोशिश मे हजरत मोहम्मद साहब का असहनीय अपमान का अपराध कर बैठा। 

हॉज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली / अभि मलऊन वसीम जैसे शापित व्यक्ति द्वारा घमासान शांत नही हुआ कि उदास मानसिकता के मालिक नरसिंहनंदसरस्वती ने अपने भ्रम में इस्लाम के एक और स्तंभ को ध्वस्त करने की कोशिश मे हजरत मोहम्मद साहब का असहनीय अपमान का अपराध कर बैठा। 

दिल्ली स्थित अहलेबैत (अ.स.) फाउंडेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष मौलाना तकी अब्बास रिजवी ने कहा कि स्वामी नरसिंहनंद सरस्वती जैसे अज्ञानी लोगों पर लगाम लगाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि राकेश तिवारी, जो कि पहले अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पदाधिकारी थे, ने पवित्र पैगंबर (स.अ.व.व.) का अपमान करके मुसलमानों की भावनाओं को आहत किया था, लेकिन सरकार इन गतिविधियों में शामिल उनके जैसे लोग आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया और किसी ने भी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की है। इसलिए, देश में संप्रदायिक लोग निडर होकर समाज में जहर घोलने के अपराध कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय राज्यों में अपराध दर और अत्याचार बढ़ रहे हैं और सरकार यह नियंत्रित करने में विफल हो रही है कि वास्तव में सरकार और उसकी न्यायपालिका के चेहरे पर थप्पड़ से कम नही है। एक तरफ सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी ’की बात कर रही है और दूसरी तरफ, वसीम रिजवी और स्वामी सरस्वती जैसे कुख्यात लोग देश में खुलेआम नफरत फैला रहे हैं! स्वामी की इस ज़हरीली हरकतों को लेकर मुसलमानों में भारी गुस्सा और आक्रोश है और इसके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया होगी। इसलिए, सरकार को ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए। 

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए निन्दा और सांप्रदायिकता बेहद खतरनाक थी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यदि हम 1857 के इतिहास को देखें, तो सांप्रदायिक संबंधों के संदर्भ में गंगा और जमनी सभ्यताओं के बीच एक सीमा है। इससे पहले कि कोई सांप्रदायिक समस्या नहीं थी, कोई भी सांप्रदायिक संघर्ष नहीं था, हिंदू और मुस्लिम शांति से रहते थे और एक दूसरे के दर्द को साझा करते थे। इससे पहले, देश के अधिकांश हिस्सों में कोई सांप्रदायिक भावना नहीं थी। और यह भारत की तरह गंगा-जमनी सभ्यता की सुंदरता थी कि हिंदू और मुसलमानों के बीच कुछ मतभेदों के बावजूद, उनके बीच कोई दुश्मनी नहीं थी। हिंदू ईद और मुहर्रम त्योहारों में शामिल होते थे और मुसलमान होली और दीवाली समारोह में शामिल होते थे और दोनों भाई-बहन की तरह रहते थे लेकिन अब! लोग एक-दूसरे की गर्दन को देखते हैं। वे श्री राम के नारे को जुल्म और हिंसा के साधन के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं और इसे एक-दूसरे को मारने की अनुमति मानते हैं! और आपने और जिस देश ने मुसलमानों को अपने तन और मन से सजाया है, आज उन्हें यहां रोजगार पाने और घर किराए पर देने में भी कठिनाई हो रही है।

मौलाना तक़ी अब्बास ने कहा कि जब भी कोई बम विस्फोट या किसी भी तरह की घटना होती है, तो पुलिस वास्तविक अपराधियों को पकड़ने के बजाय केवल आधा दर्जन मुसलमानों को गिरफ्तार करके समस्या का समाधान करेगी (क्योंकि वे वैज्ञानिक जांच में प्रशिक्षित नहीं हैं)। वर्तमान सरकार चार्ल्स वुड के नक्शेकदम पर नहीं चल रही है, जिन्होंने 1862 में वायसराय लॉर्ड एलन को एक पत्र लिखा था, 'हमने भारत में अपनी शक्ति एक समुदाय से दूसरे समुदाय को आपस मे लड़ा कर हूकूमत खड़ी की हैं और हमें इसे जारी रखना चाहिए। इसलिए आप उन्हें एकजुट करने के लिए क्या कर सकते हैं। वर्तमान राजनीतिक स्थिति देश में विचार के सभी स्कूलों के लिए प्रतिबिंब का क्षण है।

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