۶ تیر ۱۴۰۱ |۲۷ ذیقعدهٔ ۱۴۴۳ | Jun 27, 2022
बाकिर अल सदर

हौज़ा / अबा अब्दिल्लाहिल हुसैन के पवित्र रक्त की तरह, शहीद बाक़िर अल-सदर और शहीदा अमीना के रक्त ने भी इस्लाम के विकास और जीवन को जन्म दिया, चाहे वह ईरान में आने वाली इस्लामी क्रांति हो या लेबनान में हिज़्बुल्लाह का प्रतिरोध। चाहे वह फिलिस्तीन में इस्लामिक आंदोलन हमास का संघर्ष हो या इराक में इस्लामी पुनर्जागरण, यह सब शहीदों के खून की बरकत है।

हौज़ा न्यूज एजेंसी। आयतुल्लाह सैय्यद मुहममद बाक़िर अल-सदर की गणना पिछली शताब्दी के महान दार्शनिकों, धार्मिक विद्वानों में होती हैं। आपके लेखन और नेतृत्व ने इराकी लोगों सहित दुनिया के उत्पीड़ित वर्गों को छुआ और प्रज्वलित किया है। आपने न केवल धार्मिक तत्वों को चुनौती दी है, बल्कि तथाकथित धार्मिक तत्वो को भी जो क्रांतिकारी इस्लामिक विचार के रास्ते में खड़े थे। यह बाकिर अल-सदर ही थे जिन्होंने इराक में इस्लामिक दावत पार्टी की स्थापना की, जो सद्दाम के शासन के दौरान दमित शियाओं के अधिकारों के लिए लड़े, और आज भी उसी संगठन के सदस्य इराक में शियाओं का समर्थन करते हैं और पूरे इराक में इराकी मुसलमानों पर अत्याचार किया। इराक के पूर्व प्रधानमंत्रई नूरी अल-मलिकी का संबध भी इसी पार्टी से है।

शहीद बाक़िर अल-सदर का जन्म 1 मार्च, 1935 को बग़दाद के क़दीमियाह क्षेत्र में हुआ। जब वह दो साल के थे, तब उनके पिता, जाने-माने धार्मिक विद्वान सैयद हैदर अल-सदर का निधन हो गया। कदिमियाह स्कूल में प्राइमरी की शिक्षा प्राप्त की और फिर बाकिर अल-सदर और उनका परिवार 1945 में नजफ़ अशरफ़ चले गए जहाँ उन्होंने अपना शेष जीवन बिताया। उन्होंने नजफ़ अशरफ़ में एक मदरसा में दाखिला लिया और ज्ञान प्राप्त करने के लिए तेजी से आगे बढ़े। हैरानी की बात है, उन्होंने केवल 20 वर्ष की आयु में इज्तिहाद का दर्जा प्राप्त किया। उन वर्षों के दौरान, शहीद बाक़िर अल-सदर, हमारे दर्शन, इस्लामी अर्थशास्त्र, जो कि अर्थशास्त्र के रूप में भी जाना जाता है, के दर्शन पर प्रसिद्ध पुस्तकें प्रकाशित हुई, जो अभी भी इस्लामी और विदेशी हलकों में एक दस्तावेज है। शहीद बाक़िर अल-सदर की पुस्तक इक़तेसादोना इस्लामी इक़तेसादियात के विषय पर लिखी गई अब तक की सबसे विस्तृत पुस्तक है।

1957 में, शहीद बाकिर अल-सदर ने इराक में धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने और इस्लामिक विचार को पुनर्जीवित करने के लिए बाथ पार्टी को रोकने के लिए इस्लामिक दावत पार्टी, या हिज्ब अल-दावा की स्थापना की। 1970 के दशक की शुरुआत में ही बाकिर अल-सदर इस बात को जान चुके थे कि बासी आतंकवादी इराक की इस्लामिक पहचान के लिए खतरा है और इस खतरे के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखा। दूसरी ओर, सद्दाम के बाथिस्ट आतंकवादियों ने बाकिर अल-सद्र के महत्व को समझा। उन्हें पता था कि उनकी व्यक्तित्व इराकी लोगों को सबसे प्रिय है। इसलिए, उन्होंने शहीद बाक़िर अल-सदर की गतिविधियों को रोकने के लिए सभी संभव साधनों का उपयोग करना शुरू कर दिया।

इमाम हुसैन (अ.स.) के मार्ग के अनुयायी शहीद बाक़िर अल-सदर को 1971, 1974, 1977 में गिरफ्तार किया गया और 1979 में अंतिम बार गिरफ्तार किया गया। और शहीद बाकिर अल-सदर के कई साथीयो सहित दावत पार्टी के प्रमुख सदस्यो को अत्याचारी सद्दाम  मलऊन के आदेश से गिरफ्तार करके उनको फांसी दी गई।

शहीदा सैयदा आमना बिनतुल हुदा:

यह 1979 की बात है, जब बाथिस्ट आतंकवादियों ने नजफ अशरफ से शहीद बाक़िर अल-सदर को गिरफ्तार किया था। उसी समय, एक बाहिजाब महिला भागते हुए इमाम अली (अ.स.) के हरम में गई और लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “हे लोगों! तुम क्यो चुप हो? जब आपके नेता को गिरफ्तार किया गया है, तो आप चुप क्यों हैं? जब आपके अधिकार को क्रूरतापूर्वक प्रताड़ित किया जा रहा है, बाहर आकर विरोध करें। शहीदा बिन्तुल हुदा के इलाही शब्दो का यह प्रभाव था कि ”हजारों लोग अपने घरों से बाहर आए और शहीद बाक़िर अल-सदर को पकड़ने का विरोध करने लगे। सद्दामीयो ने मजबूरन उसी दिन रिहा कर दिया। विरोध ने सद्दाम के आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश भेजा कि वे लोग सद्दाम के बुरे शासन के खिलाफ खड़े होने के लिए तैयार हैं।

अपने छोटे से जीवन में, महान महिला शहीद, आमना बिनतुल हुदा, ने बिना डर ​​या एहसान के सद्दाम आतंकवादियों के खिलाफ सबसे सक्रिय भूमिका निभाई, गरीब इराकी लोगों की भलाई के लिए, शिक्षा की दूरी के लिए और जागृति के लिए। इस्लामी चेतना से जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया।

1937 में प्राचीन बगदाद में पैदा हुई शहीद आमना बिनतुल हुदा अपने घर की अकेली महिला थीं। वह पार्टी की महिला शाखा की प्रमुख थीं। 1966 में, उन्होंने जागरूकता के लिए काम करने के लिए अल-दावा पत्रिका शुरू की। उनके लेखन, जो महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं, ने समाज की जागरूकता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1967 में, उन्होंने नजफ अशरफ, बगदाद और अन्य वंचित शिया इलाकों में लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूलों का एक नेटवर्क स्थापित किया, ताकि शिया लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने सैकड़ों पुस्तकें लिखीं, जिनमें से अधिकांश काल्पनिक थीं। समाज की समस्याओं और उनके समाधानों के बारे में कहानियाँ हैं।

शहीद बाकिर अल-सदर की गिरफ्तारी और शहादत:

शहीद बकीर अल-सदर को 1979 में गिरफ्तार किया गया था। इराक में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिसमें इराकी लोगों ने सद्दाम के खिलाफ अपना दुख और गुस्सा व्यक्त किया था। 5 अप्रैल, 1980 को रिहा कर दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद 9 अप्रैल 1980 को निर्दयी सद्दामियों ने नजफ अशरफ की बिजली काट दी और शहीद बाक़िर अल-सदर के प्यारे सैयद मुहम्मद अल-सदर के घर सुरक्षा अधिकारियों को भेजा गया और उनके साथ बाथिस्ट यज़ीदी मुख्यालय में बुलाया गया, जहाँ यज़ीदी सिफत गद्दारों ने सैयद मुहम्मद अल-सदर को शहीद बाकिर अल-सदर और शहीदा आमना बिनतुल हुदा के शव दिखाए। जो खून से नहाए हुए थे, और उनके शरीर पर क्रूर अत्याचार के निशान थे, शहीद बाक़िर अल-सदर और उनकी बहन को उस रात नजफ अशरफ में दारुल सलाम कब्रिस्तान में दफनाया गया।

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