۱۴ تیر ۱۴۰۱ |۵ ذیحجهٔ ۱۴۴۳ | Jul 5, 2022
कोवैक्सीन

हौज़ा / इस्लामी क्रांति के नेता की ईरानी वैक्सीन ही लगवाने पर ख़ास ताकीद है, यह वैक्सीन ईरान के युवा वैज्ञानिकों की मेहनतों का फल है जो शरीर में भरपूर इम्युनिटी पैदा करती है।  इमाम ख़ामेनई ने विदेशी वैक्सीन लगवाने से इंकार किया और ईरानी वैक्सीन तैयार हो जाने की प्रतीक्षा की। 

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट अनुसार, डायरेक्टर एकेडमी आफ़ मेडिकल साइंसेज़ आफ़ ईरान डाक्टर अली रज़ा मरंदी ने कहा है कि इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई आने वाले दिनों में कोरोना वायरस की ईरानी वैक्सीन का पहला डोज़ इंजेक्ट करवाएंगे। 

डाक्टर मरंदी ने कहा कि कोरोना वायरस की ईरानी वैक्सीन कोव ईरान बरकत के इस्तेमाल की मंज़ूरी मिनिस्ट्री आफ़ हेल्थ एंड मेडिकल एजुकेशन से हासिल की जा चुकी है। उन्होंने आगे बताया कि इस्लामी क्रांति के नेता की ईरानी वैक्सीन ही लगवाने पर ख़ास ताकीद है, यह वैक्सीन ईरान के युवा वैज्ञानिकों की मेहनतों का फल है जो शरीर में भरपूर इम्युनिटी पैदा करती है। 

एकेडमी आफ़ मेडिकल साइंसेज़ के डायरेक्टर का कहना था कि आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कोरोना वायरस का संकट शुरू होने के बाद कह दिया था कि वैक्सीन लगवाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उन्होंने इसके लिए दो शर्तें रखी थीं। एक यह कि बारी आने पर ही उन्हें वैक्सीन लगाई जाए और दूसरी शर्त यह कि उन्हें ईरानी वैक्सीन ही लगाई जाए। 

डाक्टर मरंदी ने बताया कि इसी वजह से जब 80 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाने का सिलसिला शुरू हुआ तो इमाम ख़ामेनई ने विदेशी वैक्सीन लगवाने से इंकार किया और ईरानी वैक्सीन तैयार हो जाने की प्रतीक्षा की। 

डाक्टर मरंदी ने बताया कि सुप्रीम लीडर ईरानी वैक्सीन कोव ईरान बरकत का पहला डोज़ तब ले रहे हैं जब पिछले दो महीनों के दौरान 80 साल से अधिक उम्र के सारे देशवासियों को इम्पोर्टेड वैक्सीन लगाई जाए चुकी है। 

भारत, चीन, ब्रिटेन, अमरीका और रूस के बाद ईरान दुनिया का छटा और पश्चिमी एशिया का पहला देश है जिसने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाई है।

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