۵ تیر ۱۴۰۱ |۲۶ ذیقعدهٔ ۱۴۴۳ | Jun 26, 2022
مولانا عاشق حسین

हौज़ा/ईदे मुबाहिला असल में इस बात की दलील है कि रसूल के बाद हुकूमत का हक़ और रसूल अहले बैत अ.स. के असली वारिस कौन हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,कराची/जामा मस्जिद और इमाम बरगाह हज़रत ज़हेरा स.ल.कराची में महफिल रोज़े मुबाहिला आयोजित की गई जिसमें इमामे जुमआ वल जमाअत
मौलाना आशिक हुसैन ने विश्वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि ईदे मुबाहिला वास्तव में एक दिव्य परंपरा है जिसका उल्लेख पवित्र कुरान में अल्लाह द्वारा किया गया है।
मौलाना अपने भाषण में बयान देते हुए कहा कि ईदे मुबाहिला दर असल इस बात की दलील है कि रसूल के बाद हुकूमत का हक़ और रसूल अहले बैत अ.स.
के असली वारिस कौन हैं। बाकी फिरका मुमकिन है हर आयेत कि तविल करें लेकिन आयत मुबाहिला और रोशन दलील है जिसमें तमाम फिरका और मज़हब एक है कि इस हक और बातिल के मैदान का हकिकी वारिस और नासिर रसूल कौन था और कौन रहा है?
अंत में, उन्होंने कहा कि ईदे मुबाहिला हर दिन है जिस दिन सच्चाई की जीत होती है, भले ही इसकी शुरुआत नज़रान के ईसाइयों की हार से हुई हो।
लेकिन अल्लाह तआला ने इस दिन को कुरान के अंदर सुन्नत बना दिया

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