۲۸ مرداد ۱۴۰۱ |۲۱ محرم ۱۴۴۴ | Aug 19, 2022
वसीम अमरोहवी

हौज़ा / अमरोहा में कर्बला के वाक़ेआत को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करने का एक संगठित प्रयास किया जा रहा है। मरसिया गो शायर और चित्रकार वसीम अब्बास अमरोहवी कैनवास के माध्यम से कर्बला प्रस्तुत कर रहे हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अमरोहा  / कर्बला की दुखद घटनाओं ने मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों ने अपनी क्षमता में कर्बला के प्रभावों को स्वीकार किया और अपने तरीके से उन्होंने उनके छापों को चित्रित किया कर्बला अपनी कला से जो उनके दिल में उतर गई। अतः ललित कलाओं (फ़ुनूने लतीफा) की अभिव्यक्ति का कोई भी माध्यम इससे अछूता नहीं रहा है। भावनाओं की अभिव्यक्ति के दो तरीकों को पूरी दुनिया में बहुत मजबूत और प्रभावी माना गया है। कविता और चित्रकला। अभिव्यक्ति को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। एक तरह से शोक साहित्य कर्बला के दुख की अभिव्यक्ति से अलग हो गया है। चित्रकारी मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति का एक और महत्वपूर्ण साधन है। दुनिया के महान कलाकारों ने कर्बला को अपने कैनवास पर चित्रित किया है। लेकिन कर्बला से जुड़ी ये कृतियां (शाहकार) बिखरी पड़ी हैं।

कर्बला की कहानी तस्वीरो की ज़बानी

अमरोहा में चित्रों के माध्यम से कर्बला की घटनाओं को चित्रित करने का ठोस प्रयास किया जा रहा है। मरसिया गो शायर और चित्रकार वसीम अब्बास अमरोहवी कैनवास के माध्यम से कर्बला प्रस्तुत कर रहे हैं। वसीम अमरोहवी कर्बला की घटनाओं पर आधारित कला के दस कार्यों का संग्रह संकलित कर रहे हैं। कर्बला की इस परियोजना में कई विशेषताएं हैं। चित्रों की यह श्रृंखला मदीना से इमाम हुसैन के कारवां के प्रस्थान के साथ शुरू होती है। आशूरा के दिन होने वाली विभिन्न दर्दनाक घटनाओं को कैनवास पर इस तरह उतारा गया कि दर्शक अप्रभावित न रह सके। कर्बला से जुड़ी हर पेंटिंग का शीर्षक किसी मरसिया का मिसरा है। इस परियोजना की उपयोगिता के बारे में वसीम अमरोही कहते हैं।
 

कर्बला की कहानी तस्वीरो की ज़बानी

मरसिए के मिसरे को इस तरह से चुना गया है कि यह उस घटना का पूरा परिचय देता है जिसे कैनवास पर पेश किए गए वाक़ेआ का पूरा परिचय करा देता है। चूंकि चित्रकार वसीम अब्बास अमरोहवी खुद भी मरसिया निगार है और अनीसो दबीर के मरसिए उनके तहतुश शऊर मे महफूज़ है इसलिए उनकी पेंटिंग मे घटना की तमाम चीज़ो का ख्याल रखा गया है। 

कर्बला की कहानी तस्वीरो की ज़बानी

कर्बला की दुखद घटनाओं पर आधारित चित्रों के इस संग्रह को शोक साहित्य और चित्रकला के प्रभावी संयोजन की ऐतिहासिक कृति कहा जा सकता है। वसीम अमरोहवी का प्रयास अन्य चित्रकारो के लिए एक प्रकाशस्तंभ हो सकता है। हो सकता है कि दुनिया के दूसरे हिस्से में बैठा कोई चित्रकार कर्बला के संदेश को कैनवास पर पेंट करके दूसरे तरीके से फैलाने की कोशिश करे।

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