۸ تیر ۱۴۰۱ |۲۹ ذیقعدهٔ ۱۴۴۳ | Jun 29, 2022
शिया सुन्नी विद्वान

हौज़ा / मुंबई के एक प्रमुख धार्मिक विद्वान मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी ने कहा कि बेशक सभी को सावधान रहने की ज़रूरत है। इस महामारी के खतरनाक रूप को दुनिया देख चुकी है और इससे होने वाले नुकसान से हर कोई वाकिफ है, इसलिए एहतियात का रास्ता दिखाने के लिए यह अनुभव काफी होगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कोरोना की नई लहर को देखते हुए विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने सावधान रहने को कहा है।

दिल्ली में फतेह पुरी मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है, आपको किसी भी चालान के कटने का इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि सरकार जो कुछ भी कर रही है या सोच रही है वह जनता की सुरक्षा से संबंधित है।

उन्होंने आग्रह किया कि कोई भी गुप्त कार्यक्रम न करे और ऐसी सभाओं से खुद को दूर रखे। उन्होंने कहा "महामारी से डरो मत और अफवाहें मत फैलाओ, एहतियात एक आसान एहतियात है," ।

उन्होंने कहा कि घर में भी इबादत की गुंजाइश है, इसलिए भीड़ न लगाएं और न ही इसका हिस्सा बनें।

दिल्ली की पार्लियामेंट स्ट्रीट मस्जिद के इमाम मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने भी अपील की है कि कोरोना लहर की तीव्रता को देखते हुए हम सभी को सावधान रहने की जरूरत है, सावधानी से हम ही नहीं समाज भी सुरक्षित रहेगा।

कोलकाता नाखुदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने कहा कि हालात बिगड़ते जा रहे हैं और बिगड़ते हैं या नहीं यह हम सब पर निर्भर करेगा।

उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म ने बहुत स्पष्ट संदेश दिया है कि मानव जीवन सबसे कीमती चीज है इसलिए हमें खुद भी सुरक्षित रहना है और दूसरों के लिए खतरे को भी दूर करना है। कोलकाता के इमाम-ए-ईद कारी अल्ताफ-उर-रहमान ने भी कहा कि कोरोना महामारी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सभी को सावधानी बरतनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सभी को इस बीमारी से बचाव के उपाय करने चाहिए क्योंकि यह उनके लिए अच्छा है। उन्होंने कहा कि हमारे पैगंबर इस्लाम (स.अ.व.व.) ने भी यही संदेश दिया है कि परहेज़ इलाज से बेहतर है।

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