۶ تیر ۱۴۰۱ |۲۷ ذیقعدهٔ ۱۴۴۳ | Jun 27, 2022
बुकनाला

हौज़ा /बुकनाला सादात में जनाब मास्टर फ़य्याज़ हुसैन नक़वी साहब के दरे दौलत पर "बज़्म-ए क़मर बुकनाला सादात" की दसवीं तरही नशिस्त  बउन्वाने "मदहे मौलाये काएनात अलैहिस्सलाम" का आयोजन किया गया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, असमोली ब्लॉक के गांव बुकनाला सादात में जनाब मास्टर फ़य्याज़ हुसैन नक़वी साहब के दरे दौलत पर "बज़्म-ए क़मर बुकनाला सादात" की दसवीं तरही नशिस्त बउन्वाने "मदहे मौलाये काएनात अलैहिस्सलाम" का आयोजन किया गया।

नशिस्त का आग़ाज़ हस्बे दस्तूरे साबिक़ आली जनाब मौलाना मौलवी सैयद शाने हैदर बाक़री साहब ने तिलावते कलाम ए पाक से किया तिलावते आयाते क़ुरआनी के बाद जनाब फ़िरदौस मेहदी नक़वी "फ़िरदौस" बुकनालवी" ने नाते सरवरे कायनात पेश की।

नाते सरवरे कायनात के बाद जनाब मु०ग़ाज़ी नक़वी "गुमान बुकनालवी" द्वारा दिए गए मिसरए तरह

"अली के बाद अली का जवाब कोई नहीं"

पर बज़्म-ए क़मर बुकनाला सादात के शोअरा ने अपने-अपने मतरूहा कलाम पेश किए सबसे पहले अपना तरही कलाम पेश करते हुए जनाब दानिश बुकनालवी ने कहा

लरज़ उठे जिसे सुनकर सितम के कारिंदे
अली की बेटी के जैसा ख़िताब कोई नहीं

उसके बाद शाइरे अहलेबैत और पत्रकार जनाब मोहम्मद अली "अली बुकनालवी" ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा

दे रिज़्क़ भूखों को मुर्दों को जिंदगी बख़्शे
मेरे अली सा मसीहा जनाब कोई नहीं

जनाब फ़िरदौस मेहदी "फ़िरदौस बुकनालवी" ने अपना मतरूहा कलाम पेश करते हुए कुछ यूं फ़रमाया

इसी पे आ के पयम्बर सलाम करते हैं
दरे बतूल सा दुनिया में बाब कोई नहीं

जनाब "शादाब बुकनालवी" ने मौलाये काएनात अलैहिस्सलाम की बारगाह में मन्ज़ूम नज़राना-ए अक़ीदत पेश करते हुए फ़रमाया

ख़ुदा ने बज़्म-ए क़मर को ये वस्फ़ बख़्शा है
सभी भले हैं यहां पर ख़राब कोई नहीं

ऑनलाइन अपना कलाम पेश करते हुए साहिबे मिसरा जनाब "गुमान बुकनालवी" साहब ने फ़रमाया

तलाश लाख करो तुम तमाम दुनिया में
कलामे पाक के जैसी किताब कोई नहीं

साहिबे ख़ाना जनाब मास्टर फ़य्याज़ हुसैन साहब के फ़रज़न्द-ए अरजुमन्द और शाइरे आले मोहम्मद जनाब इनायत हुसैन "इनायत बुकनालवी" ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा

हुसैन आज भी करबल बसाये बैठे हैं
मगर यज़ीद सा ख़ाना ख़राब कोई नहीं

अंजुमन शमशीरे अब्बास के मशहूर ओ मारूफ़ नौहाख़्वान और शायरे अहलेबैत जनाब अब्बास हैदर नक़वी "अब्बास बुकनालवी" ने निहायत ख़ूबसूरत आवाज़, दिलकश अंदाज़ और निहायत हसीन लब-ओ लहजे में कुछ यूं फ़रमाया

सवाल ये था अली का जवाब है कोई ?
जवाब ये है अली का जवाब कोई नहीं

इसके बाद अंजुमन ए पंजेतनी के मशहूर ओ मारूफ़ नौहाख़्वान और शाइरे अहलेबैत जनाब "सरकार बुकनालवी" साहब ने हस्बे मामूल अपने मख़्सूस अन्दाज़ में फ़रमाया

नहीं है हुब्बे अली जिनके दिल में ऐ सरकार
नमाज़ लाख पढ़े पर सवाब कोई नहीं

वाक़िफ़-ए मज़ाक़-ए सुख़न, माहिर-ए इल्म-ए अरुज़ जनाब परवेज़ हैदर नक़वी "शदान बुकनालवी" ने अपना कलाम पेश करते हुए कुछ यूं फ़रमाया

जो इसमें ग़र्क़ हुए बूज़र-ओ कुमैल बने
अली के इश्क़ में ख़ाना ख़राब कोई नहीं

अपने कहे गये नौहों‌ की मार्फ़त बर्रे सग़ीर (हिंदो-पाक) में ख़ासी मक़बूलियत हासिल करने वाले शाइरे अहलेबैत और साहिबे बज़्म जनाब "क़मर बुकनालवी" साहब ने अपना तरही कलाम पेश करते हुए इस तरह फ़रमाया

ऐ मूसा ज़िद न करो जुज़ अली के दुनिया में
खु़दा के नूर की लाये जो ताब कोई नहीं

सिरसी से तशरीफ लाए हुए मेहमान शायर जनाब मुस्तफ़ा रज़ा वारसी "रज़ा सिरसवी" ने निहायत हसीन-ओ मुरस्सा-ओ जवाहर निगार अपना मतरूहा कलाम पेश करते हुए इस तरह फ़रमाया

अली के इस्म की तफ़सीर ये बताती है
"अली के बाद अली का जवाब कोई नहीं"

आख़ीर में अपना तरही कलाम पेश करते हुए शहंशाहे सोज़ो सलाम बेहतरीन तरन्नुम के मालिक उस्ताद शायर जनाब "नईम बाक़री बुकनालवी" ने कहा

हो बह्स-ओ ज़िद जो इबादात की अगर बुनियाद
इबादतों का फिर ऐसी सवाब कोई नहीं

नशिस्त में मुल्क और क़ौम की तरक़्क़ी के लिए दुआ की गई निज़ामत के फ़राइज़ जनाब नईम बाक़री बुकनालवी ने अंजाम दिए नज़्रे मौलाये काएनात अलैहिस्सलाम का इंतजाम साहिबे ख़ाना जनाब मास्टर सै० फ़य्याज़ हुसैन नक़वी साहब ने किया नशिस्त में आली जनाब मौलाना शाने हैदर बाक़री, जनाब मुख़्तार हुसैन नक़वी, जनाब रज़ा अब्बास नक़वी, जनाब मुहम्मद अली नक़वी, जनाब सिकन्दर रज़ा नक़वी, जनाब क़दीम हैदर बाक़री, जनाब डा० यामीन हैदर बाक़री, जनाब शाने अहमद बाक़री, जनाब सरफ़राज़ हैदर नक़वी, जनाब नय्यर अब्बास नक़वी, जनाब सख़ाउल हसनैन बाक़री, जनाब रईसुल हसन नक़वी, जनाब मोहम्मद नबी नक़वी, जनाब मोहम्मद गुलरेज़ बाक़री, जनाब इरशाद हुसैन नक़वी, जनाब मोहम्मद बिलाल बाक़री, जनाब रियाज़ हुसैन नक़्वी, जनाब मोहम्मद मोहसिन नक़वी, जनाब मुहम्मद अदीब नक़वी, जनाब डा० रईस हैदर नक़वी, जनाब मोहम्मद नाज़ नक़वी, जनाब शबाब हैदर नक़वी साहब आदि ने शिरकत की।

जनाब मास्टर फ़य्याज़ हुसैन नक़वी साहब ने अपने घर पर तशरीफ़ लाए सभी मेहमान हज़रात का शुक्रिया अदा किया मेहमान हज़रात ने साहिबे ख़ाना की इज़्ज़त-ओ दौलत-ओ उम्र में मज़ीद इज़ाफ़े की दुआ की और तमाम मरहूमीन मोमेनीन-ओ मोमेनात के ईसाले सवाब के लिये फ़ातेहा पढ़ी गयी !

لیبلز

تبصرہ ارسال

You are replying to: .
7 + 2 =