۱۱ تیر ۱۴۰۱ |۲ ذیحجهٔ ۱۴۴۳ | Jul 2, 2022
मौलाना अबुल कासिम

हौज़ा / इमामे जुमआ मेलबोर्न ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलिया के शिया उलेमा परिषद के अध्यक्ष: जन्नतुल बकीअ को तुरंत बनाया जाना चाहिए, ज़ियारत की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और सऊदी सरकार को मुसलमानों पर वहाबी इस्लाम और यहूदी संस्कृति नहीं थोपनी चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, इमामबारगाह क़ायम और ऑस्ट्रेलियाई हूमैन राइटस कमीशन (Australian human right commission ) द्वारा जन्नतुल बकीअ के विध्वंस की 99वीं वर्षगांठ पर मंगलवार, 10 मई, 2022 को मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में एक शोक और विरोध सभा आयोजित की गई।

इमामबारगाह में शोक जुलूस को संबोधित करने वाले पहले स्थानीय विश्वासी हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना अबुल क़ासिम रिजवी ने जन्नतुल बकीअ और जन्नतुल मोअल्ला के तत्काल निर्माण की मांग की, और शियाओं को उनके अधिकार दिए जाएं, और सऊदी सरकार पिछले अपराधों के लिए इस्लामी जगत से माफी मांगे ।

मौलाना ने संयुक्त राष्ट्र और विश्व मानवाधिकार चैंपियन संगठनों और संस्थानों से पूछा कि सऊदी शासकों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

मौलाना ने युवाओं से कहा कि इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर फैलाएं और लोगों के बीच जागरूकता आंदोलन शुरू करें। अहलेबैते रसूल, पैगंबर (स.अ.व.व.) के जीवनसाथी और परिवार के लोगो की दरगाहो का तुरंत निर्माण किया जाना चाहिए, जियारत की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और वहाबी इस्लाम और यहूदी सभ्यता को लागू नहीं करना चाहिए। शोक सभा के बाद नौहा पड़ा गया र उसके बाद विश्वासियों बाहर मोमबत्तियां जलाई और प्रतिभागियों ने बाहर प्लेकार्डस के साथ विरोध किया। बच्चो के हाथो मे प्लेकार्डस थे। गगन भेदी नारो से फ़िजा गूंज उठी बाहर मौलाना ने पहले उर्दू मे उसके पश्चात अंग्रेजी में विरोध रैली को संबोधित किया उसके बाद दुआ के साथ रैली समाप्त हुई।

इन करोड़ो क़ुमक़ुमो की रोशनी का क्या करूँ?
नूर के ख़ालिक़...चिराग़े कब्रे ज़हरा चाहिए

मुसद्दक़ लखानी

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