۲۵ مرداد ۱۴۰۱ |۱۸ محرم ۱۴۴۴ | Aug 16, 2022
शोक संदेश

हौज़ा / मरहूम का दुनिया से चला जाना जामिया इमाम अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) नजफ़ी हाउस के लिए एक बड़ी क्षति है। मरहूम कोरोना काल मे भी शिक्षण में लगे हुए थे। पिछले दिनो मरहूम की आंखो की रोशनी कम हो गई थी लेकिन उसके बावजूद अपने हाफ़्ज़े की बुनियाद पर शिक्षण में लगे हुए थे

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन शेख मुहम्मद अली नजफी के निधन पर जामिया इमाम अमीरूल मोमेनीन (अ.स.) के प्रिंसिपल हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सैयद अहमद अली आबिदी ने अपने शोक संदेश मे कहा मरहूम अत्यधिक दिल सोज़, दयालु, छात्र मित्रवत और बेहतरीन शिक्षक थे।

शोक संदेश कुछ इस प्रकार है:

इन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलैहे राजेऊन

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन आक़ा मुहम्मद अली नजफी जिन्हे आज मरहूम, ताबा सराह या रहमातुल्लाह अलैह कहते हुए आखे रो रही है और दिल गिरया कर रहा है, जामिया इमाम अमीरूल मोमेनीन (अ.स.) के एकमात्र शिक्षक थे जो पहले दिन से इस मदरसे मे अपनी सेवाए प्रदान कर रहे थे। आफ अत्यधिक दिल सोज़, दयालु, छात्र मित्रवत और बेहतरीन शिक्षक थे मरहूम अरबी और फारसी भाषा पर पूर्ण महारत रखते थे। आप बा अखलाक़, मुत्ताक़ी, परहेजगार और मदरसे के प्रति बहुत दिल सोज़ थे। आज तक किसी भी छात्र को मृतक के बारे में शिकायत करने का अवसर नहीं मिला है।

दिवंगत अध्यापन में बहुत समय के पाबंद थे और हर पहलू से छात्रों का ख्याल रखते थे। जिम्मेदार शिक्षक और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने वाला ऐसा शिक्षक नही मिलेगा। वे एक बहुत अच्छे लेखक थे। दिवंगत ने मदरसे में अरबी भाषा के पाठ्यक्रम के लिए कई पुस्तकों का संकलन किया जो अभी भी मदरसे के पाठ्यक्रम में शामिल है।

दिवंगत का निधन जामिया इमाम अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) नजफी हाउस के लिए एक बड़ी क्षति है। कोरोना काल में भी उन्होंने पढ़ाना जारी रखा। वह शिक्षण और सीखने में लगे हुए थे।

कुछ दिन पहले हम मृतक से श्रीनगर में मिले थे। हमने उनसे पढ़ाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि आंखों में दर्द के कारण वह पढ़ा नहीं सकते। हमने कहा कि हम उन्हें इस तरह नहीं छोड़ सकते। तो दिवंगत बहुत खुश हुए और उनकी खुशी की इंतेहा नही रही।

इस समय मृतक का निधन हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। अल्लाह तआला उन्हे आइम्मा ए मासूमीन (अ.स.) के साथ महशूर फ़रमाए और इमाम जमाना (अ.त.फ.श.) की शिफाअत नसीब फ़रमाए और उनके छात्रो को इस गमनाक मौके पर सब्र अता फ़रमाए। आमीन

वस्सलामो अलैकुम वा रहमतुल्लाह वा बराकातोह

सैयद अहमद अली आबिदी

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